जीवन

एकान्त इक दिन बैठ सोचूँ कि, कैसा जीवन चाहिए? विचार-विश्व जो चित्र बनाता, वैसा जीवन चाहिए, कुछ ऐसा जीवन चाहिए।। निर्वात पत्र हो, श्वेत वस्त्र हो, कलम अस्त्र को हस्त थामे, अनंतसार लिखता ही जाऊँ। कुछ ऐसा जीवन चाहिए।। मन सी हो गति, कर्म के प्रति, हो कर्मयोग में ऐसी निष्ठा, जो कर्मयोगी नाम पाऊँ। … More जीवन

न जाने क्यों

न जाने क्यों मैं चल रहा हूँ। हार का सफ़र अनोखा, असत्य को देता हूँ मौका। जीवन की इस जंग में अरसे से मैं जल रहा हूँ। न जाने क्यों मैं चल रहा हूँ। अभी जीत में अंतर बड़ा है, सामने पूरा विश्व खड़ा है। मन ही मन में डर रहा हूँ। न जाने क्यों … More न जाने क्यों

मृत्यु

नाम उसका मृत्यु है। सृष्टि के प्रारम्भ में आकाश, तारों से भी पहले सर्वप्रथम आविष्कार था नाम उसका मृत्यु है। जीवन के आरंभ में गृहत्याग करने पर गर हार का जो भाव था नाम उसका मृत्यु है। स्वप्न की पहचान में कई वक्त से चलता ही जाऊँ हर मोड़ पर जब हार पाऊँ नाम उसका … More मृत्यु

विश्व शांति

​वृक्ष से मैं प्राण भरता ब्रम्हाण्ड का आव्हान् सुनता। वृहद पृथ्वी को देखकर मैं वृहद बडा विचार करता। ये कैसी शिक्षा कैसी दीक्षा पृथ्वी की कैसी परीक्षा। परमात्मा मुझको दे ये भिक्षा क्या है शिक्षा, क्या है शिक्षा। अभियांत्रिकी या यांत्रिकी शिक्षा है किस प्रांत की। ब्रम्हाण्ड ने अब गर्जना की मैं बात करता शांति … More विश्व शांति