जीवन

एकान्त इक दिन बैठ सोचूँ कि, कैसा जीवन चाहिए? विचार-विश्व जो चित्र बनाता, वैसा जीवन चाहिए, कुछ ऐसा जीवन चाहिए।। निर्वात पत्र हो, श्वेत वस्त्र हो, कलम अस्त्र को हस्त थामे, अनंतसार लिखता ही जाऊँ। कुछ ऐसा जीवन चाहिए।। मन सी हो गति, कर्म के प्रति, हो कर्मयोग में ऐसी निष्ठा, जो कर्मयोगी नाम पाऊँ। … More जीवन